Ads

घर में निरूपमा राय और बाहर मल्लिका शेरावत ...?

>> Tuesday, June 8, 2010

 ऐसा क्यों है कि भीड़ में या 
सूनसान में  अकेली लड़की को पा कर
                  मर्दो  के अंदर का ‘रावण’ जाग ही जाता है.....  ???? 


24 comments:

narottam June 8, 2010 at 3:47 AM  

ऐसे ‘रावणों’ का वध भी वैसा ही होना चाहिए...

राजकुमार सोनी June 8, 2010 at 3:49 AM  

बहुत ही उम्दा कार्टून बनाया है आपने। आपको बधाई।

राजकुमार सोनी June 8, 2010 at 3:50 AM  

यही सच्चाई भी है। पुरूषवादी समाज की मानसिकता ही कुछ ऐसी है।

narottam June 8, 2010 at 3:51 AM  

मत सता लड़की को, ये पाप होगा।
तू भी किसी दिन, किसी लड़की का बाप होगा।।

'उदय' June 8, 2010 at 4:00 AM  

... bahut khoob... jhakkaas !!!!

kajal June 8, 2010 at 4:31 AM  

सरेआम ऐसे लोगों की जम कर पिटाई होनी चाहिए...तब शायद ये सुधरें...

kajal June 8, 2010 at 4:34 AM  

लडकियों को चाहिए कि ऐसे हालात से जमकर मुकाबला करें...चाहे इसमें उनकी जान ही क्यों न चली जाए...

nonsense times June 8, 2010 at 4:40 AM  

नमन है आपको अजय जी..

Sanjay Sharma June 8, 2010 at 5:34 AM  

वो इसलिए कि निरूपा रॉय का बेटा ,फरीदा जलाल का भाई
भी बाज़ार में ऐसी ही नज़र रखता है .

आचार्य जी June 8, 2010 at 6:08 AM  

आईये जानें ....मानव धर्म क्या है।

आचार्य जी

विजयप्रकाश June 8, 2010 at 6:42 AM  

वाह... बहुत सुंदर

डॉ टी एस दराल June 8, 2010 at 9:15 AM  

शायद आपका तात्पर्य निरूपा राय से है ।
प्रभावशाली अभिव्यक्ति ।

उपदेश सक्सेना June 8, 2010 at 9:22 AM  

अजय जी निरुपमा राय नहीं निरूपा राय...

डॉ महेश सिन्हा June 8, 2010 at 9:31 AM  

बेचारा रावण , एक बार गलती की और हमेशा के लिए बुक हो गया :)

परशुराम June 8, 2010 at 2:28 PM  

क्या बात है छेड़ाछाडी कुछ होता भी है रावण तो रावण है ना अब ये बात उसको कौन समझाए किन्तु आज कल रावण से ज्यादा राखी सावंत का जलवा है सोचो अगर रावण को ही छेड़ दिया जय तो क्या वो चुप बैठेगा नहीं ना

देवेन्द्र तिवारी June 8, 2010 at 2:33 PM  

रावण जागता नहीं है जगाया जाता है

Gourav Agrawal June 8, 2010 at 5:27 PM  

पाठ्यक्रम में नैतिक शिक्षा अनिवार्य तो है पर उसे प्रमुख विषय बना चाहिए (विज्ञान और गणित जैसा)और उसमे ऐसी कहानिया उन्हें बचपन में पढ़नी चाहिए जिनसे अगर भविष्य में भटकें भी तो थोड़े से उपदेश से ही लाइन पर आ जाएँ , इससे मुझे लगता है छेड़ छाड़ की घटनाओ में कमी आएगी

वाणी गीत June 8, 2010 at 9:28 PM  

सटीक व्यंग्य ..!!

ajay saxena June 9, 2010 at 12:52 AM  

सज्जनों माफी चाहता हूं कि मै निरूपा राय को निरुपमा राय समझता था.. धन्यवाद ..दुबारा ख्याल रखूंगा... मेरी पोस्ट में आए सभी ब्लागर का आभार..
आभार उस ब्लागर का भी जिसने नापसंद का चटका लगा कर मुझे बेहतर पोस्ट लिखने के लिए प्रेरित किया...

girish pankaj June 9, 2010 at 1:34 AM  

gaharaa vyangya..badhai ajay...

ajay saxena June 9, 2010 at 1:55 AM  

मेरे गुरू भाई आदरणिय गिरीश पंकज जी पहली बार मेरे ब्लाग में आए..मैं धन्य हुआ आपका आभार....संजीत जी का भी आभार

माधव June 9, 2010 at 3:57 AM  

this is called double standard

Post a Comment

indali

Followers

  © Blogger template Simple n' Sweet by Ourblogtemplates.com 2009इसे अजय दृष्टि के लिये व्यवस्थित किया संजीव तिवारी ने

Back to TOP